"री सिमा ! क्या कर रही है ऊपर बैठी नीचे आ देख कितना मज़ा आ रहा है होली मे"ताई ने आवाज़ दी "पता नही क्या हुआ कल तक तो अछि हस बोल रही थी रात टिबिया पर क्या खबर आई चेहरे का रंग ही बदल गया "ताई बड़बड़ाते हुए बाहर निकली कमरे में सिमा अपने प्यारे लला के तस्वीर हाथ मे लिए बैठी थी जो सरहद पर तैनात था,अभी कल ही तो बात हुई थी फ़ोन पर , कह रहा था-"माँ होली पर नही आ पाउगा लेकिन दीवाली पर पक्का ,नाराज़ मत हो माँ यहाँ माहौल खराब चल रहा है समझा करो" बेटे से फ़ोन पे बात हुई शाम को tv पे खबर आ रही थी कि सरहद पर गोला बारी शुरु हो गई है । बेटे को सुबह से फ़ोन लग नही रहा। सही है माँ उस हाल में होली कैसे खेले जब उसका बेटा खून की होली खेल रहा हो इतने में फ़ोन की घण्टी बजती है सिमा दौड़ती हुई फ़ोन की तरफ दौड़ती है ,"हा बेटा कैसा है तू" फोन सरहद से ही था,लेकिन बोल कोई और रहा था फोन पर कोई कुछ बोलता है और सिमा के हाथों से अचानक बेटे की तस्वीर जमीन पर गिरकर टुकड़े टुकड़े हो जाती है.......................…
Wednesday, March 20, 2019
Saturday, March 9, 2019
महात्मा ने कुछ नही बताया
एक बार की बात है महात्मा के मठ में कुछ लोग आए ,महात्मा ध्यान लगाएं थे वो लोग बैठ गए ,उनमे से किसी ने उठ कर प्रश्न किया-"
हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ"
महात्मा ने उचे स्वर में बोला -"चुप हो जाओ"
कुछ समय लोग शांत रहे फिर एक ओर आदमी उठा और कहा -" हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ" इस बार महात्मा का स्वर पहले से तेज़ था-"शांत हो जाओ" लोग कुछ समय फिर शांत बैठ गए, कुछ समय हुआ ,फिर एक आदमी खड़ा हुआ बोला -"कृपया हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताईये" इस बार महात्मा अपनी आँखें लाल करके बोले-"बोला न मुँह बंद रख ,अब ये सवाल मत पूछना" लोग उठे और अपने घरों की तरफ चल दिये
अक्सर लोग बोल रहे थे -"महात्मा ने कुछ बताया नही" और
कुछ लोग शांत हो कर चल रहे थे
"क्या सच मे महात्मा ने कुछ नही बताया" (Abrar khan)
कुछ समय लोग शांत रहे फिर एक ओर आदमी उठा और कहा -" हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ" इस बार महात्मा का स्वर पहले से तेज़ था-"शांत हो जाओ" लोग कुछ समय फिर शांत बैठ गए, कुछ समय हुआ ,फिर एक आदमी खड़ा हुआ बोला -"कृपया हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताईये" इस बार महात्मा अपनी आँखें लाल करके बोले-"बोला न मुँह बंद रख ,अब ये सवाल मत पूछना" लोग उठे और अपने घरों की तरफ चल दिये
अक्सर लोग बोल रहे थे -"महात्मा ने कुछ बताया नही" और
कुछ लोग शांत हो कर चल रहे थे
"क्या सच मे महात्मा ने कुछ नही बताया" (Abrar khan)
Friday, March 8, 2019
पैसो की कीमत में फ़र्क़
"माँ मुझे 500 रु चाहिए"- मैने माँ से कहा
माँ-"क्यों अभी कल ही तो 1000 रुपये दिए थे"
माँ वो कल पार्टी में खर्च हो गए
माँ-" नही अब नही मिलेंगे "
माँ प्लीज सिर्फ 500 रुपये ही तो है दे भी दो, मुझे frieand के साथ घूमने जाना है मेने प्रोमिस किया था"
माँ ने कहा -"नही "
माँ और मै बात कर ही रहे थे कि अचानक लता दीदी कमरे में आकर सफाई करने लगी
काम करते करते बोली -"मालकिन मुझे कल 500 रु दे देना में अपनी लड़की ये यहाँ जा रही हु बहुत दिन हुए नवासी को देखे हुए "
माँ ने 500 रुपये निकाले ओर लता दीदी के हाथ मे रख दिये ये देख कर मै जोर से दरवाज़ा बजाता हुआ निकल गया
बात गुज़र गई कुछ दिन बाद लता दीदी वापस सफाई कर रही थी
माँ ने पूछा -"मिल आई नवासी से" दीदी -"हाँ मैडम , आपने 500 रु दिए थे बहुत काम आए "
"अच्छा क्या ले गई थी नवासी के लिए "माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा"
दीदी हिसाब बताने लगी
"150 की साड़ी बेटी के लिए
100 का जमाई राजा के लिए शर्ट पीस
50 का मिठाई ओर चाकलेट
50 की नवासी के लिए गुड़िया
70 रुपये किराया
100 रुपये बेटी जमाई को हाथ मे दे आई
ओर गांव में बर्फी बहुत बढ़िया मिलती है तो 30 की बर्फी ले आई आपके लिए "
ये कहते हुए उन्होंने बर्फी की पुड़िया मेरे हाथ मे दे दी मै बर्फी खाते खाते सोच रहा था "कितना फ़र्क़ है मेरे 500 ओर लता दीदी के 500 मे"
-अबरार खान
माँ-"क्यों अभी कल ही तो 1000 रुपये दिए थे"
माँ वो कल पार्टी में खर्च हो गए
माँ-" नही अब नही मिलेंगे "
माँ प्लीज सिर्फ 500 रुपये ही तो है दे भी दो, मुझे frieand के साथ घूमने जाना है मेने प्रोमिस किया था"
माँ ने कहा -"नही "
माँ और मै बात कर ही रहे थे कि अचानक लता दीदी कमरे में आकर सफाई करने लगी
काम करते करते बोली -"मालकिन मुझे कल 500 रु दे देना में अपनी लड़की ये यहाँ जा रही हु बहुत दिन हुए नवासी को देखे हुए "
माँ ने 500 रुपये निकाले ओर लता दीदी के हाथ मे रख दिये ये देख कर मै जोर से दरवाज़ा बजाता हुआ निकल गया
बात गुज़र गई कुछ दिन बाद लता दीदी वापस सफाई कर रही थी
माँ ने पूछा -"मिल आई नवासी से" दीदी -"हाँ मैडम , आपने 500 रु दिए थे बहुत काम आए "
"अच्छा क्या ले गई थी नवासी के लिए "माँ ने मुस्कुराते हुए पूछा"
दीदी हिसाब बताने लगी
"150 की साड़ी बेटी के लिए
100 का जमाई राजा के लिए शर्ट पीस
50 का मिठाई ओर चाकलेट
50 की नवासी के लिए गुड़िया
70 रुपये किराया
100 रुपये बेटी जमाई को हाथ मे दे आई
ओर गांव में बर्फी बहुत बढ़िया मिलती है तो 30 की बर्फी ले आई आपके लिए "
ये कहते हुए उन्होंने बर्फी की पुड़िया मेरे हाथ मे दे दी मै बर्फी खाते खाते सोच रहा था "कितना फ़र्क़ है मेरे 500 ओर लता दीदी के 500 मे"
-अबरार खान
इब्राहिम को ईश्वर का सबक
इब्राहिम, वो इंसान है जिसका मुस्लिम ,ईसाई ओर यहूदी तीनो धर्म मत में वर्णन मिलता है
हिन्दू मत में कुछ विद्वानों का विचार है कि ब्रम्हा इब्राहिम का बदला स्वरूप है-
हिन्दू मत में कुछ विद्वानों का विचार है कि ब्रम्हा इब्राहिम का बदला स्वरूप है-
हज़रत इब्राहिम की आदत थी कि जब भी भोजन करते तो अकेले नही करते, किसी गरीब या यात्री को साथ ले कर भोजन करते थे ।
एक बार की बात है 2 से 3 दिन गुजर गए, इब्राहिम के घर कोई मेहमान या गरीब नही आया, आदत अनुसार इब्राहिम किसी गरीब या मुसाफिर को ढूढने बाजार की तरफ गए। कुछ समय घूमने पर उन्हें एक बूढ़ा यात्री मिला जिसे ले कर वो घर आये ,घर वालो को कहा -खाना लगाए ,खाना लगाया गया बूढ़ा यात्री आपके साथ खाने बैठा अपने कहा ईस्वर का नाम ले कर शुरू करो,
बूढ़े यात्री ने कहा में नास्तिक हु में ईश्वर का नाम नही लूंगा
इब्राहिम गुस्से से तमतमाये ओर बोले -"जो तुम्हें ओर मुझे खिलाता है तुम उसका नाम नही ले सकते तुमको लेना होगा"
बूढ़ा यात्री ने मना किया और उठ कर चल दिया
एक बार की बात है 2 से 3 दिन गुजर गए, इब्राहिम के घर कोई मेहमान या गरीब नही आया, आदत अनुसार इब्राहिम किसी गरीब या मुसाफिर को ढूढने बाजार की तरफ गए। कुछ समय घूमने पर उन्हें एक बूढ़ा यात्री मिला जिसे ले कर वो घर आये ,घर वालो को कहा -खाना लगाए ,खाना लगाया गया बूढ़ा यात्री आपके साथ खाने बैठा अपने कहा ईस्वर का नाम ले कर शुरू करो,
बूढ़े यात्री ने कहा में नास्तिक हु में ईश्वर का नाम नही लूंगा
इब्राहिम गुस्से से तमतमाये ओर बोले -"जो तुम्हें ओर मुझे खिलाता है तुम उसका नाम नही ले सकते तुमको लेना होगा"
बूढ़ा यात्री ने मना किया और उठ कर चल दिया
कुछ समय बाद ईश्वर ने इब्राहिम पर आकाशवाणी की -"इब्राहिम उस बूढ़े को खाना क्यों नही खिलाया"
इब्राहिम ने उत्तर दिया-"हे ईश्वर वो तुझे नही मानता था
ईश्वर ने कहा -"इब्राहिम बता सकते हो उसकी आयु कितनी थी
इब्राहिम-"80-90 वर्ष रही होगी"
ईश्वर ने कहा -"जब 90वर्ष से वो मेरा इनकार कर रहा है और 90 वर्ष से में उसको रोज़ खिला -पिला रहा हु तो तुम एक दिन नही खिला सकते "
ये बात सुन कर इब्राहिम बाजार की तरफ भागे उस यात्री को ढूढा ओर खाना खाने का आग्रह किया
उस यात्री ने कहा मेरी शर्त याद है
इब्राहिम ने कहा -"हा याद है "
यात्री ने खाना खाते खाते बोला "कुछ समय पूर्व तो तुम ने मुझे खाना नही खिलाया ओर फिर वापस आग्रह कर के खिला रहे हो ,क्यों?"
इब्राहिम ने कहा-"जिस ईश्वर का तुम इनकार करते हो उसी ईश्वर ने तुमको खाना खिलाने का आदेश दिया है"
यात्री हक्का बक्का हो कर इब्राहिम को देखने लगा.................
(Abrar khan)
इब्राहिम ने उत्तर दिया-"हे ईश्वर वो तुझे नही मानता था
ईश्वर ने कहा -"इब्राहिम बता सकते हो उसकी आयु कितनी थी
इब्राहिम-"80-90 वर्ष रही होगी"
ईश्वर ने कहा -"जब 90वर्ष से वो मेरा इनकार कर रहा है और 90 वर्ष से में उसको रोज़ खिला -पिला रहा हु तो तुम एक दिन नही खिला सकते "
ये बात सुन कर इब्राहिम बाजार की तरफ भागे उस यात्री को ढूढा ओर खाना खाने का आग्रह किया
उस यात्री ने कहा मेरी शर्त याद है
इब्राहिम ने कहा -"हा याद है "
यात्री ने खाना खाते खाते बोला "कुछ समय पूर्व तो तुम ने मुझे खाना नही खिलाया ओर फिर वापस आग्रह कर के खिला रहे हो ,क्यों?"
इब्राहिम ने कहा-"जिस ईश्वर का तुम इनकार करते हो उसी ईश्वर ने तुमको खाना खिलाने का आदेश दिया है"
यात्री हक्का बक्का हो कर इब्राहिम को देखने लगा.................
(Abrar khan)
8 मार्च (विश्व महिला दिवस)
महिला सशक्तिकरण
कस्बे में महिला दिवस की तैयारियां ज़ोरों से चल रही थी, धूम धाम से मंच तैयार किया जा रहा था ,महफ़िल सजी रंगमंच होने लगा ,
मुख्य अतिथि थी विधयिका जी जो कि पूर्व विधायक जी की धर्म पत्नी थी ,वो क्या है ना इस बार इलाके में महिला सीट आ गई थी।
प्रोग्राम के बीच मे विधायक जी की कार आकर रुकती है ,खूब फूल मालाओं से विधायक और उनके पतिदेव का स्वागत किया जाता है आसान ग्रहण करवाया जाता है ,
कुछ समय बाद विधयिका जी को अपने विचार रखने के लिए माइक पर बुलाया जाता है
विधयिका जी माइक पर आती है और अपने पति देव को देख कर कहती है -"मैं कुछ बोलू जी"
मुख्य अतिथि थी विधयिका जी जो कि पूर्व विधायक जी की धर्म पत्नी थी ,वो क्या है ना इस बार इलाके में महिला सीट आ गई थी।
प्रोग्राम के बीच मे विधायक जी की कार आकर रुकती है ,खूब फूल मालाओं से विधायक और उनके पतिदेव का स्वागत किया जाता है आसान ग्रहण करवाया जाता है ,
कुछ समय बाद विधयिका जी को अपने विचार रखने के लिए माइक पर बुलाया जाता है
विधयिका जी माइक पर आती है और अपने पति देव को देख कर कहती है -"मैं कुछ बोलू जी"
बस इतना में भीड़ तालिया बजा देती है.........
(By abrar khan)
(By abrar khan)
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