एक बार की बात है महात्मा के मठ में कुछ लोग आए ,महात्मा ध्यान लगाएं थे वो लोग बैठ गए ,उनमे से किसी ने उठ कर प्रश्न किया-"
हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ"
महात्मा ने उचे स्वर में बोला -"चुप हो जाओ"
कुछ समय लोग शांत रहे फिर एक ओर आदमी उठा और कहा -" हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ" इस बार महात्मा का स्वर पहले से तेज़ था-"शांत हो जाओ" लोग कुछ समय फिर शांत बैठ गए, कुछ समय हुआ ,फिर एक आदमी खड़ा हुआ बोला -"कृपया हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताईये" इस बार महात्मा अपनी आँखें लाल करके बोले-"बोला न मुँह बंद रख ,अब ये सवाल मत पूछना" लोग उठे और अपने घरों की तरफ चल दिये
अक्सर लोग बोल रहे थे -"महात्मा ने कुछ बताया नही" और
कुछ लोग शांत हो कर चल रहे थे
"क्या सच मे महात्मा ने कुछ नही बताया" (Abrar khan)
कुछ समय लोग शांत रहे फिर एक ओर आदमी उठा और कहा -" हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताओ" इस बार महात्मा का स्वर पहले से तेज़ था-"शांत हो जाओ" लोग कुछ समय फिर शांत बैठ गए, कुछ समय हुआ ,फिर एक आदमी खड़ा हुआ बोला -"कृपया हमे ईश्वर प्राप्ति का रास्ता बताईये" इस बार महात्मा अपनी आँखें लाल करके बोले-"बोला न मुँह बंद रख ,अब ये सवाल मत पूछना" लोग उठे और अपने घरों की तरफ चल दिये
अक्सर लोग बोल रहे थे -"महात्मा ने कुछ बताया नही" और
कुछ लोग शांत हो कर चल रहे थे
"क्या सच मे महात्मा ने कुछ नही बताया" (Abrar khan)
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