Friday, March 8, 2019

इब्राहिम को ईश्वर का सबक

इब्राहिम, वो इंसान है जिसका मुस्लिम ,ईसाई ओर यहूदी तीनो धर्म मत में वर्णन मिलता है
हिन्दू मत में कुछ विद्वानों का विचार है कि ब्रम्हा इब्राहिम का बदला स्वरूप है-
हज़रत इब्राहिम की आदत थी कि जब भी भोजन करते तो अकेले नही करते, किसी गरीब या यात्री को साथ ले कर भोजन करते थे ।
एक बार की बात है  2 से 3 दिन गुजर गए, इब्राहिम के घर कोई मेहमान या गरीब नही आया, आदत अनुसार इब्राहिम किसी गरीब या मुसाफिर को ढूढने बाजार की तरफ गए। कुछ समय घूमने पर उन्हें एक बूढ़ा यात्री मिला जिसे ले कर वो घर आये ,घर वालो को कहा -खाना लगाए ,खाना लगाया गया बूढ़ा यात्री आपके साथ खाने बैठा अपने कहा ईस्वर का नाम ले कर शुरू करो,
बूढ़े यात्री ने कहा में नास्तिक हु में ईश्वर का नाम नही लूंगा
इब्राहिम गुस्से से तमतमाये ओर बोले -"जो तुम्हें ओर मुझे खिलाता है तुम उसका नाम नही ले सकते तुमको लेना होगा"
बूढ़ा यात्री ने मना किया और उठ कर चल दिया
कुछ समय बाद ईश्वर ने इब्राहिम पर आकाशवाणी की -"इब्राहिम उस बूढ़े को खाना क्यों नही खिलाया"
इब्राहिम ने उत्तर दिया-"हे ईश्वर वो तुझे नही मानता था
ईश्वर ने कहा -"इब्राहिम बता सकते हो उसकी आयु कितनी थी
इब्राहिम-"80-90 वर्ष रही होगी"
ईश्वर ने कहा -"जब 90वर्ष से वो मेरा इनकार कर रहा है और 90 वर्ष से में उसको रोज़ खिला -पिला रहा हु तो तुम एक दिन नही खिला सकते "
ये बात सुन कर इब्राहिम बाजार की तरफ भागे उस यात्री को ढूढा ओर खाना खाने का आग्रह किया
उस यात्री ने कहा मेरी शर्त याद है
इब्राहिम ने कहा -"हा याद है "
यात्री ने खाना खाते खाते बोला "कुछ समय पूर्व तो तुम ने मुझे खाना नही खिलाया ओर फिर वापस आग्रह कर के खिला रहे हो ,क्यों?"
इब्राहिम ने कहा-"जिस ईश्वर का तुम इनकार करते हो उसी ईश्वर ने तुमको खाना खिलाने का आदेश दिया है"
यात्री हक्का बक्का हो कर इब्राहिम को देखने लगा.................
                               (Abrar khan)

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