"री सिमा ! क्या कर रही है ऊपर बैठी नीचे आ देख कितना मज़ा आ रहा है होली मे"ताई ने आवाज़ दी "पता नही क्या हुआ कल तक तो अछि हस बोल रही थी रात टिबिया पर क्या खबर आई चेहरे का रंग ही बदल गया "ताई बड़बड़ाते हुए बाहर निकली कमरे में सिमा अपने प्यारे लला के तस्वीर हाथ मे लिए बैठी थी जो सरहद पर तैनात था,अभी कल ही तो बात हुई थी फ़ोन पर , कह रहा था-"माँ होली पर नही आ पाउगा लेकिन दीवाली पर पक्का ,नाराज़ मत हो माँ यहाँ माहौल खराब चल रहा है समझा करो" बेटे से फ़ोन पे बात हुई शाम को tv पे खबर आ रही थी कि सरहद पर गोला बारी शुरु हो गई है । बेटे को सुबह से फ़ोन लग नही रहा। सही है माँ उस हाल में होली कैसे खेले जब उसका बेटा खून की होली खेल रहा हो इतने में फ़ोन की घण्टी बजती है सिमा दौड़ती हुई फ़ोन की तरफ दौड़ती है ,"हा बेटा कैसा है तू" फोन सरहद से ही था,लेकिन बोल कोई और रहा था फोन पर कोई कुछ बोलता है और सिमा के हाथों से अचानक बेटे की तस्वीर जमीन पर गिरकर टुकड़े टुकड़े हो जाती है.......................…
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